Our Founder

श्री जयमंगल संस्कृत महाविद्यालय की स्थापना राजा श्रीकृष्ण दत्त महाविद्यालय जौनपुर में हिंदी विभाग के तत्कालीन प्रवक्ता प्रो० सुरेन्द्र कुमार मिश्र "नागर " ने तत्कालीन राजा श्री यादवेन्द्र दत्त दुबे के परामर्श से संवत् 2028 (सन्
1975 ) में हुयी। प्रारम्भ में यह महाविद्यालय संस्थापक महोदय के अधक प्रयास से स्थापित हुआ। इसमें प्रथमा से आचार्य तक की शिक्षा सभी विषयों की दी जाती है। इस समय प्राचार्य को लेकर कुल 12 अध्यापक अध्यापन कार्य
कर रहे हैं।ं महाविद्यालय उत्तर प्रदेश शासन द्वारा सहायता प्राप्त, राज्य-अनुदानित संस्था है जो संस्कृत शिक्षा में अपना विशेष महत्व रखता है। इस समय संस्था में लगभग 400 से अधिक छात्र-छात्राये अध्ययन कर रहे है। महाविद्यालय को सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी द्वारा आचार्य पर्यन्त मान्यता प्राप्त हैं। महाविद्यालय के उत्तीर्ण छात्रों को सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी एवं माध्यमिक छात्रों को उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद्, लखनऊ द्वारा उपाधियाॅँ प्राप्त होती है।

महाविद्यालय को वेतनादि के लिए उत्तर प्रदेश द्वारा राजकीय आर्थिक सहायता प्राप्त है व यदाकदा केन्द्रीय सरकार द्वारा भी विकास हेतु अर्थ सहायता प्राप्त होती है। इन्हीं सहायताओं से महाविद्यालय अपना व्यय भार वहन करता
है।

महाविद्यालय में प्रतिवर्ष 28 फरवरी, विज्ञान दिवस के अवसर पर वार्षिकोत्सव मनाया जाता है। महाविद्यालय में संस्कृत, साहित्य, व्याकरण, दर्शन, मीमांसा, पुराणेतिहास, सांख्ययोग, वेद, प्रभृति विषयों की शास्त्री स्तर की शिक्षा एवं संस्कृत साहित्य में आचार्य पर्यन्त शिक्षा दी जाती है। इसके साथ-साथ ज्योतिष एवं खगोल, पुरोहित एवं कर्मकांड, नव्याव्याकरण, वेद-वेदांग, योग एवं अध्यात्म तथा अनेक महत्वपूर्ण प्राच्य भारतीय परंपरा में सनहित सांस्कृतिक विरासत के रूप में विधमान अनेक भाषाओं के साथ आधुनिक विषय ज्ञान-विज्ञान कि भी शिक्षा प्रदान की जाती है |

Founder
स्वं० प्रोफेसर सुरेन्द्र कुमार मिश्र "नागर"
अवकाश प्राप्त प्रवक्ता हिंदी
राजडिग्री कॉलेज, जौनपुर
संस्थापक

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