- संस्कृत वाॅग्मय का प्रचार, पठन-पाठन और संस्कृत भाषा की उन्नति के लिए प्रयास करना व प्राचीन भारतीय संस्कृत भाषा का प्रचार व प्रसार करना।
About College
श्री जयमंगल संस्कृत महाविद्यालय, नरी, खुंशापुर, जौनपुर की आधारशिला संस्कृत के महान विद्वान मनीषी कर्मयोगी एवं दशर्निक श्री जयमंगल दास जी के नाम पर हिंदी के सुप्रसिद्ध साहित्यकार एवं राजडिग्री कॉलेज जौनपुर के तत्कालीन प्रवक्ता प्रो० सुरेन्द्र कुमार मिश्र "नागर" ने 28 फरवरी दिन शुक्रवार सन 1975 में विज्ञान दिवस के दिन रखी थी । जो सबसे पहले घासफूस के बने झप्पर के रूप में आश्रम व्यवस्था के रूम में थी । जो आज अनेक शैक्षिक पष्पों के रूप में पुष्पित एवं पल्लवित हो रहा है । जिसकी संस्कृत शिक्षा अपने क्षेत्र में ही नहीं अपितु पूरे भारत मे सुगन्ध विखेर रही है ।Vision & Mission
संस्कृत वाॅग्मय का प्रचार, पठन-पाठन और संस्कृत भाषा की उन्नति के लिए प्रयास करना व प्राचीन भारतीय संस्कृत भाषा का प्रचार व प्रसार करना । संस्कृत माध्यमिक विद्यालय एवं महाविद्यालय चलाना, विद्यार्थियों को प्रोत्साहित कर उनको वि़द्यालय में प्रवेश देना, उनको प्रशिक्षित करना तथा प्रथमा से उत्तर मध्यमा तक व शास्त्री से आचार्य पर्यन्त परीक्षाओं हेतु अध्यापन द्वारा उन्हें परीक्षा के लिए तैयार करना, परीक्षा दिलाना और उत्तीर्ण छात्रों को प्रमाण-पत्र/उपाधि दिलाना । पुस्तकालय एवं छात्रावास इस संस्था के अध्यापकों व छात्रों के लिए स्थापित करना, उसकी समुन्नति करना एवं योग्य विद्यार्थियोें को छात्रवृत्ति देना एवं छात्रवृत्ति हेतु अर्थ-व्यवस्था करना।Principal Message
हम सब मिलकर संस्कृत भाषा को आगे बढ़ाये जो भारत के निर्माण में सदैव सहायक सिद्ध हुई है । अतीत की धरोहर जो अपनी विलक्षण क्षमता के कारण हजारो लाखो वर्षो के पश्चात भी अपने अस्तित्व को आधुनिक समय मे भी बचाये हुए है । संस्कृत भाषा से ही संस्कृति और संस्कार बनते है, जो भारत की मूल धरोहर है । आज संस्कारो को पुनः जीवित एवं पोषित करने की आवश्यकता है जिससे की ये अपने प्राचीन शिखर पर पहुंच सके । वैसे तो प्रत्येक भाषा विचारो का आदान प्रदान का माध्यम कही जाती है, संस्कृत भाषा जिसे देववाणी भी कहा जाता है ।Copyright © Shree Jaimangal Sanskrit Mahavidyalaya - All Rights Reserved.







