अध्यक्ष का संदेश

अत्यन्त हर्ष की बात है कि सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से सम्बद्ध जनपद जौनपुर बक्शा विकास खण्ड में स्थित श्री जयमंगल संस्कृत महाविद्यालय, नरी, खुशापुर, जौनपुर की स्थापना सन् 1975 में हुयी जिसे स्थायी मान्यता प्रदान की गयी | स्थापना काल से ही अद्यतन यह महाविद्यालय निरन्तर प्रगति के पथ पर अग्रसरित है | यह महाविद्यालय कला संकाय के माध्यम से उच्च शिक्षा के क्षेत्र में छात्रों को शिक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन कर रहा है | इस गौरवशाली कृति से हमें प्रेरणा मिली कि हम उन लोगों का स्मरण करें जो नीव के पत्थर हैं | आज के छात्रों और नयी पीढ़ी को उनके उद्यम की जानकारी देना भी जरुरी है जिसके बदौलत वे अपने ही क्षेत्र में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे है |

उ.प्र. प्रदेश के जौनपुर जनपद में स्थित यह महाविद्यालय पूर्वांचल के ग्रामीण पृष्ठभूमि में प्राथमिक, माध्यमिक एवं उच्च शिक्षा को प्रसारित करने का कार्य निरन्तर कर रहा है | यहाँ की अधिकांश जनसंख्या गाँव में निवास करती है जो पूर्णत: कृषि पर निर्भर है | ऐसे पिछड़े क्षेत्र में उच्च शिक्षा का दीप जलाकर आदरणीय प्रबन्धक जी ने इस क्षेत्र को एक नयी दिशा देने का निरन्तर प्रयास कर रहे है |

मैंने पाया कि महाविद्यालय परिवार में शिक्षा का उत्तोरोत्तर विकास करने का भाव है, कर्मचारी गण कर्तव्यनिष्ठ है और छात्र भी जिज्ञासु हैं | बस आवश्यकता है वातावरण को और बेहतर बनाने की | इस बीच कई बार अवसर मिला माननीय प्रबन्धक जी के सानिध्य का | उनकी हमेशा यही इच्छा रही है कि महाविद्यालय अपने शैक्षिक उत्कर्ष को प्राप्त कर इस पिछड़े क्षेत्र का हमेशा उत्थान करता रहे | उनके विचार, आशीर्वाद और समर्थन ने इस महाविद्यालय को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक नयी उचाई प्रदान की | इस तर्क परसम्मत विचार के साथ हमें प्रगति पथ पर निरन्तर आगे बढ़ाना है | सफलता का मार्ग प्रशस्त करना है, संघर्षों और संकल्पों के माध्यम से हमें प्रेरणा लेनी होगी मिट्टी के एक नन्हे दीप से जो सूर्य के अवसान के उपरान्त उपजने वाले गहन काले अन्धकार के विरुद्ध संघर्ष करता है |

ग्रामीण परिवेश में बना यह महाविद्यालय अपनी मेधावी छात्र-छात्राओं के माध्यम से अविकसित को विकसित जड़ को चेतन, नर्म को प्रौढ़ा एवं रूढ़ि को नूतनता प्रदान कर एक कलिमय क्रान्ति लाकर विकास पथ अग्रसर कर नवचेतना की दीप जलाकर विगत वर्षो से जडता, शठता, मूढ़ता एवं रूढ़िवादिता को भस्म कर एक विमल आलोक देकर देश के विभिन्न पटलों तथा सीमावर्ती क्षेत्रो को आलोकित कर रहा है |

लोचकता और कठोरता दोनों तटों को अपनाते हुए यह शिक्षण संस्थान सरिता अबाध गति से सुयोग्य नागरिक सलिल प्रवाहित करते हुए राष्ट्र चेतना, नव-जागरण भूमि को सिंचित करते हुए एक नूतन व्यवस्था का शीतलता प्रदान कर रही है |

वर्तमान अतीत को देखकर आशान्वित होते हुए भविष्य की कामना सुह्रदयजनों के आशीर्वाद एवं परमआराध्या वाणी की देवी के लीला –विलास का आकांक्षी सम्पूर्ण महाविद्यालय परिवार, प्रबन्ध कारिणी समिति इस प्रयास में सतत प्रयत्नशील है और रहेगा |

श्री कुलशेखर मिश्रा
ग्राम पो ० - बौडिया, जिला - सुल्तानपुर
अध्यक्ष

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